नमस्कार

12 May 2010

.....ये तो होना ही था!

वो हो ही गया जिसका अंदेशा था। अंदेशा क्या.... हमें तो भरोसा था। अपने धोनी भाई मॉडलों की फौज लेकर वेस्ट इंडीज़ से लौट रहे हैं। चैनल स्यापा कर रहे हैं, अखबार शोक सन्देश छाप रहे हैं और धोनी अपने स्टार मॉडलों पर निशाना साध रहे हैं... आईपीएल पार्टियों की आड़ में!

जिस दिन वेस्ट इंडीज़ से ये बहादुर हारे थे, हमारे पास एक एसएमएस आया था, जाहिर तौर पर धोनी के "धुरंधरों" को गाली देने के लिए। हमने तभी लिखा था कि ये खिलाड़ियों की नहीं मॉडलों की टीम है और खेल में तो खिलाड़ी जीतते हैं, मॉडल नहीं। दिलचस्प है कि इसी बात की तस्दीक आज के अखबार में छपी एक खबर ने कर दी। दैनिक जागरण में पढ़ा कि धोनी ने किसी इवेंट कंपनी पर करीब ८ करोड़ रुपये का दावा ठोका है। कमाल है भाई, जब इन्हें ८ करोड़ रुपये कमाने का मौक़ा यूं ही मिल जाता है, तो खेलने की क्या ज़रुरत है।

खैर॥ मैं कुछ और कहना चाहता हूँ। टीम हारी तो मुझे ठीक ही लगा... आईपीएल के वक़्त से चढ़ा क्रिकेट का भूत कुछ कम तो हुआ। चेन्नई की टीम के आईपीएल जीतने पर धोनी की तारीफ़ में कसीदे पढने वाले खबरिया चिनल आज उन्हीं को पानी पीकर गरिया रहे थे। कुछ तो उन्हें कप्तानी से हटाने की मांग तक कर रहे थे। बहुत वाजिब मांग है अलबत्ता कुछ देर से की जा रही है। इस पर अगली बार बात करेंगे। फिलहाल एक सवाल.... आप तुषार खांडेकर को जानते हैं? राजदीप सिंह का नाम सूना है आपने? अच्छा झूलन से तो आप वाकिफ होंगे ही?

नहीं!!!!!! अरे... तुषार दलित खेल हॉकी के उम्दा खिलाड़ी हैं, जिनके २ गोल की बदौलत भारत ने इसी हफ्ते वर्ल्ड चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को धोया है। अजलान शाह हॉकी में राजदीप सिंह भी उम्दा खेल दिखा रहे हैं। भारत अभी तक पाकिस्तान, कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को धुन चुका है। झूलन महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं, जो भारत को महिला २०-२० में विश्व कप के सेमी फाइनल तक पहुंचा चुकी हैं। लेकिन आप इन्हें नहीं जानते क्योंकि अखबारों में इनकी बहादुरी को एक छोटा सा कोना हासिल हो पाता है और चैनल तो इन पर और बी कम वक़्त "बर्बाद" करते हैं। तो ऐसे में आपको बताएगा कौन। जीत हॉकी टीम की होती है और अखबार प्रैक्टिस कर रहे एक बच्चे की तस्वीर छापते हैं क्योंकि वो क्रिकेट के "भगवान" सचिन का बेटा है। उसके बारे में खुद भगवान भी नहीं बता सकते कि वो किसी लायक बनेगा या नहीं क्योंकि रोहन गावस्कर की "प्रतिभा" हम देख चुके हैं, जिन्होंने डार्विन के इस सिद्धांत को सही साबित कर दिया कि धाँसू क्रिकेटर का बेटा धाँसू क्रिकेटर हो, ये ज़रूरी नहीं। फिर भी महिला क्रिकेट टीम के फोटो कम छापते हैं, सचिन के बेटे के ज़्यादा। यहाँ तक कि हॉकी मैच के बजाय मॉडलों की क्रिकेट टीम के वौलीबौल खेलते फोटो ज़्यादा छपते हैं। आखिर क्यों भाई? ऐसे कौन से सुर्खाब के पर लगे हैं इन मॉडलों के? ये तो पद्म सम्मान लेने राष्ट्रपति के पास भी नहीं पहुँचते। हाँ अगर कोई कंपनी १ करोड़ के फ्लैट की चाबी दे, तो आधी रात को पहुँच जाते हैं।

ऐसे लोगों से आप उम्मीद ही क्या करते हैं। किसी वक़्त रवि शास्त्री, कपिल देव वगैरह खेलते थे और खाली वक़्त में विमल, बूस्ट, पामोलिव के विज्ञापन करते थे। आज तो टीम ही मॉडलों की है... ज़ाहिर है कि वो विज्ञापन करते हैं, आईपीएल की नौटंकी में हिस्सा लेते हैं, कंपनियों के कहने पर स्टेज पर आते हैं और खाली वक़्त बचता है तो जनता के दबाव की वज़ह से देश के लिए खेल लेते हैं।

आज हार गए हैं तो भी फ़िक्र नहीं है उन्हें क्योंकि जनता तो भूल ही जायेगी। फिर कोई टूर्नामेंट होगा, मीडिया फिर पगला जायेगी, जनता फिर टीवी से चिपक जायेगी और बीच में विज्ञापन से कमाई तो हो ही रही है। फिर चिंता किस बात की। चिंता तो हॉकी के खिलाड़ी करें क्योंकि वेतन के लिए उन्हें आन्दोलन करना पड़ता है, कम्पनियां तो खैर उनके नाम ही नहीं जानती होंगी। चिंता तो बाइचुंग भूटिया करें जिनके करिश्मे की यूरोप में पूछ है, भारत में तो फुटबॉल को ही कोई नहीं पूछता। यहाँ तो साहब बस क्रिकेट है। उसी का जलवा है, वही खेल है और उसमें शिरकत करने वाले मॉडल ही खिलाड़ी हैं। बाकी तो खेलकूद है जिसके लिए माँ बाप बचपन में ही मन कर देते हैं.

2 टिप्पणियाँ:

Bhuwan Bhaskar ने कहा…

बहुत खूब. क्रिकेट अब इस देश में खेल तो रह ही नहीं गया है. धंधा हो गया है. हर कोई अपना धंधा चुनने के लिए स्वतंत्र है. धोनी और कंपनी भी. लेकिन कृपया इस पर देश के लिए कोई महान काम करने या देश के लिए खेलने का मुलम्मा ना चढ़ाया जाए.

Bhavesh (भावेश ) ने कहा…

बिलकुल सही लिखा है आपने. सुधि पाठकों को शायद ये भी नहीं पता होगा कि कल ही भारतीय शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने शतरंज में बुल्गारिया के प्रतिद्वंदी वैसलीन टोपालोव को हरा कर अपना विश्व चैंपियनशिप खिताब बरकरार रखा है. खैर खेल के बाजार में भी वो ही चलता है जो बिकता है और मीडिया भी उसे ही बेचने में लग जाता है.