तो आखिरकार भाजपा को अक्ल आ ही गयी. झारखंड में सत्ता के फेर में फ़ज़ीहत कराने के कगार पर आ चुकी पार्टी ऐन मौके पर संभल गयी और गुरु जी का मंतर जपना बंद कर दिया. दरअसल ये जो गुरु जी यानी शिबू सोरेन हैं, ये अपने पड़ोसी सूबे के लालू प्रसाद की ही तरह हैं. मरते मर जाओ लेकिन इन दोनों पर कभी भरोसा नहीं करो. वैसे तो कहा जाता है कि राजनेताओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए, लेकिन ये दोनों तो इस सिद्धांत को अक्षरशः सही साबित करने पर आमादा हैं.
संप्रग को बचाने के लिए गुरु ने भाजपा को संसद में धोखा तो दे दिया, लेकिन बाद में चक्कर में फंस गए. गुरु की सरकार पर जब आन पड़ी तो उन्हें भाजपा ही तारणहार लगी. आनन फानन में कह दिया कि भाजपा की सरकार को समर्थन दे देंगे. उनके पार्टी वालों ने तो ब्लैक के अमिताभ बच्चन की तरह गुरु को भी अल्ज़ाइमर होने की बात कह दी और कैफियत दी कि संसद में गलती से वो संप्रग के पक्ष में बटन दबा गए. गज़ब की कहानी है गुरु की. लेकिन जैसे ही भाजपा सत्ता के लालच में उनसे बात करने को तैयार हो गयी, गुरु का धंधा शुरू हो गया. कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए दाना फेंका और सत्ता के लिए अपनी लार से कई पोखर भरने वाले गुरु उसे चुगने के लिए झपट पड़े. पिछले ४ हफ़्तों में गुरु ने जितने बयान बदले हैं उतने तो सरकार ५ साल में नहीं बदल पाती है. आखिर भाजपा को मामला समझ आया और उसने समर्थन वापस लिया.
वैसे भाजपा को पहले ही समझना चाहिए था की गुरु तो कांग्रेस का ही है. जब हर्षद मेहता का मामला सामने आया था, तभी यह भी पता चला था की नरसिंह राव की सरकार बनवाने के लिए गुरु ने मोटी रकम ऐंठी थी. इसलिए इस गुरु के ज़मीर की तो बात ही नहीं करनी चाहिए. इसकी औकात देखिये.
१- कांग्रेस की सरकार बनवाने के लिए करीब २० साल पहले इसने पहली बार दलाली खाई थी. ये पता चल गया, उससे पहले की दलालियाँ अभी पता नहीं चल सकी हैं. रिश्वत मामले में तो इसे जेल में भी ठूंसा गया था.
२- इसके खिलाफ चिरूडीह में हत्याकांड का मामला सामने आया, जिस वक़्त संप्रग की पिछली सरकार में वो कोयला मंत्री था. वारंट निकला और विपक्ष के दबाव में इसे कैबिनेट से निकाल दिया गया.
३- लेकिन कांग्रेस ने अपने चरित्र के मुताबिक़ झारखंड में भाजपा के खिलाफ समीकरणों के तहत इसे २००४ में ही दोबारा मंत्री बना दिया. सत्ता का सुख चखने के लिए ये मंत्री पद छोड़कर झारखंड में सरकार बनाने चल दिया. नाकाम रहा और कांग्रेस ने इसे फिर मंत्री का ओहदा थमा दिया. इस बार इस पर अपने सचिव का क़त्ल कराने का आरोप लगा. भारत के इतिहास में शायद ही कभी कोई केंद्रीय मंत्री पुलिस से बचने के लिए कुत्तों की तरह भागता फिरा हो, ये भागा और कई हफ़्तों तक भागा. इसे आजीवन कारावास की सज़ा हुई और जेल में दाल दिया गया. दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे उस मामले में बरी कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी चल रहा है.
४- इस पर ह्त्या का एक और मामला चल रहा है. मधु कोड़ा की तरह इसने भी खान के पट्टे और ठेके दिलाने के लिए कितनी रकम डकारी, इसके राज्य में सभी जानते हैं.
ऐसे घोषित अपराधी पर भाजपा को भरोसा क्यों करना चाहिए था. इसे समर्थन देकर तो उसने नीचता का काम किया ही, गनीमत है की वक़्त पर समर्थन वापस लेकर अपनी जग हंसाई बचा ली. ऐसे गुरु को जितनी जल्दी दक्षिणा देकर विदा करो अच्छा है, शुक्र है भाजपा ने सही कदम उठाया.
यह इंसान महामूर्ख है या मुसलमानों का शातिर दुश्मन !
6 महीने पहले


1 टिप्पणियाँ:
अच्छा चिन्तन है मित्र
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